Saturday, July 25, 2009

Phenomenal growth in Seva Karya all over Bharat : सेवा दिशा 2009 ( Seva Disha 2009 )







Phenomenal growth in Seva Karya all over Bharat

http://www.rssonnet.org/index.php?option=com_content&task=view&id=106

Rashtriya Seva Bharati compiles and publishes a report of Seva karya growth after every 5 years. The report is called 'Seva Disha'. Started in 1995 with the cooperation of Seva Vardhini of Pune, this report has previously been published in 1997 and 2004.

Along with Rashtriya Seva Bharati, the social service projects and institutions inspired by the organizations Vanvasi Kalyan Ashram, Vishwa Hindu Parishad, Bharat Vikas Parishad, Rashtra Sevika Samiti, Vidya Bharati, Deen dayal Shodh Sansthan, and Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad are also counted in this report. To collect, collate and present the ever-growing vast data of all these social service projects is a tough task and Seva Vardhini has done it in quite an appreciable way. Along with statistical data, the report presents salient features of some path breaking experiments going on in the various parts of the nation.

Seva Disha 2009, which was published on the occasion of All Bharat 'Prant Pracharak Baithak' [annual meeting of state organizers] of Rashtriya Swayamsevak Sangh, highlights some remarkable features of the growth of Social service projects. The service activities all over the nation including the remote parts of Bharat have grown by more than 1 lakh as compared to 2004. But it is not just statistical growth. The dimensions of the various projects touch almost every weaker section of the society. The 'Arogya Rakshak' [village health volunteer] scheme being run in remote villages of various states, the 'Bal Gokulam' of Kerala, the 'Char Sutri Dhan' scheme of Maharashtra, the self help groups of Tamilnadu, projects for 'street children' in Delhi and other metros, the 'education for child labour' project in Andhra, are but sample examples of the all encompassing initiative of Swayamsevaks working in social service field.


The complete report 'Seva Disha 2009' shall be published on http://rssonnet.org in near future.


A review of the ' Sangh Shiksha Varg' conducted in the last 2 months at 60 places all over Bharat was also taken at this meeting which was held in Merath on 12,13 and 14 July.. This year, 10479 Swayamsevaks from 6982 places participated as trainees in the 'Pratham Varsha' [first year] Sangh Shiksha Varg, which is a part of a three year course. 2581 Swayamsevaks participated in the 'Dwitiya Varsha' [second year training], while 973 Swayamsevaks completed the 'Trutiya Varsha' [third year] training. Every year, the Swayamsevaks who have completed the initial training of the Sangh called 'Prathamik Shiksha Varg', are eligible to participate in these 20 days residential course



देशभर के सेवाकार्यों में लक्षणीय बढो़त्री : सेवा दिशा 2009


राष्ट्रीय सेवा भारती के द्वारा देशभर में चलाये जा रहे सेवा कार्योंका एक संख्यात्मक आलेख तथा उल्लेखनीय आयामों का शब्दचित्र हर पाँच साल बाद 'सेवा दिशा' नाम से प्रकाशित होता है।पुणे स्थित सेवा वर्धिनी के सहयोग से 1995 में प्रथम बार यह संकलन एक देशव्यापी सर्वेक्षण के आधार पर प्रस्तुत किया गया था।उसके बाद 1997,2004,और अभी 2009 में प्रकाशित 'सेवा दिशा',देशभर में फैल रहे सेवाकार्यों की बढो़त्री को नापने का एक अद्भुत प्रयास रहा है। राष्ट्रीय सेवा भारती के साथ-साथ वनवासी कल्याण आश्रम,विश्व हिन्दु परिषद,भारत विकास परिषद,राष्ट्र सेविका समिति,विद्या भारती,दीनदयाल शोध संस्थान,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इन संगठनों के द्वारा प्रेरित अलग-अलग सेवा संस्थाओं के सेवा कार्यों को भी इस में संकलित किया जाता है।
दिनांक 12, 13, 14 जुलाई को मेरठ में सम्पन्न हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रांत प्रचारकों की अखिल भारतीय बैठक में सेवा दिशा 2009 का प्रकाशन किया गया। सेवा दिशा 2009 में प्रकाशित तथ्य यह दर्शाते हैं की देश के सभी प्रांतों में और दुर्गम क्षेत्रों में,निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहें स्वयंसेवकों ने और उनके द्वारा निर्मित स्वयंसेवी संस्थाओं ने सेवाकार्यों के माध्यम से समाज परिवर्तन के लिये एक सशक्त पहल की है।


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इन सबके द्वारा चलाये गये सेवा के उपक्रमों में 2004 से 2009 तक 1 लाख से भी अधिक कार्यों की वॄद्धी हुई है।


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एकल विद्यालय


ये केवल संख्यात्मक वॄद्धि नहीं है। ग्राम आरोग्य के लिए आरोग्य रक्षक योजना,एकल विद्यालयों का शैक्षिक प्रयोग,केरल में चल रहे बाल गोकुलम् की अद्भुत संस्कार क्षमता,महाराष्ट्र में और गुजरात में चल रहा चार सूत्री धान खेती का प्रसार,तामिलनाडु में महिलाओं के स्वयं सहायता समूह,दीप पूजा का कार्यक्रम,व्यसन मुक्ती,दिल्ली में तथा और कुछ शहरों में सड़क पर रहने वाले बच्चों के लिए चलने वाले प्रकल्प,बंगलोर और पुणे में चल रहा युवाओं को सेवा कार्य के लिए प्रेरित करने वाला युवा फॉर सेवा उपक्रम,आंध्र का बाल मजदुरों के लिए शिक्षा का प्रकल्प,


char sutri


चार सूत्री धान खेती

ये सभी यही दर्शातें है की सेवा कार्य के आयाम भी बढ़ रहे हैं,अधिक सर्वस्पर्शी हो रहे हैं,तथा उपेक्षित समाज की समस्याओं का जड़ से समाधान करने की दिशा में अग्रसर हो रहे है


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संपूर्ण सेवा दिशा 2009 आगामी कुछ ही दिनों में http://rssonnet.org इस वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।

इस बैठक में किये गए वृत्त संकलन के अनुसार पूरे देश में शहर और गाँव मिलाकर 6982 स्थानों से 10479 तरूणों ने इस बार संघ के प्रथम वर्ष की शिक्षा ग्रहण की। द्वितीय वर्ष में 2581 तथा तृतीय वर्ष में 923 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया गया। शिक्षार्थियों को शाखा संचालन और शारीरिक कौशल्य के अतिरिक्त ग्राम विकास, आपदा प्रबंधन, नगरी सेवा बस्तियों में सेवा उपक्रम ऐसे विषयों में भी प्रशिक्षित किया गया। प्रतिवर्ष चलने वाले 20 दिन के इन निवासी वर्गों में, संघ की प्राथमिक शिक्षा ग्रहण किये हुए स्वयंसेवकों में से चुने हुए स्वयंसेवकों को प्रवेश दिया जाता हैं। मई के प्रारंभ से लेकर जून के अन्त तक चलने वाले यह वर्ग संघ के कार्यकर्ता प्रशिक्षण की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है।


इस बैठक में आगामी विजयादशमी से प्रारंभ होने वाली विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा को सफल बनाने हेतू आवश्यक सहयोग की दृष्टि से भी चर्चा की गयी। आगामी 30 सितम्बर को कुरुक्षेत्र से इस यात्रा का शुभारंभ पूज्य संत बाबा रामदेव जी की उपस्थिति में होगा।








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