Tuesday, July 13, 2010
श्री कुप्. सी. सुदर्शन द्वारा रामशंकर अगिन्होत्री को शोक श्रद्धांजलि
श्री कुप्. सी. सुदर्शन द्वारा रामशंकर अगिन्होत्री को शोक श्रद्धांजलि
आषाढ़ कृष्ण 12 ईस्वी सं. कलियुग - 5112 09-07-2010 कल जब रायपुर से श्री राजेन्द्र दुबे ने समाचार दिया कि मेरे अति आत्मीय, परम मित्र परामर्शदाता व मार्गदर्शक श्री रामशंकर जी अग्निहोत्री परमात्मचरणों में...
आषाढ़ कृष्ण 12 ईस्वी सं. कलियुग - 5112 09-07-2010
कल जब रायपुर से श्री राजेन्द्र दुबे ने समाचार दिया कि मेरे अति आत्मीय, परम मित्र परामर्शदाता व मार्गदर्शक श्री रामशंकर जी अग्निहोत्री परमात्मचरणों में लीन हो गये तो ऐसा लगा कि अभिन्नता में आधा भाग अलग हो गया है। सन् 1942 से 1946 तक, जब मैं मध्यप्रदेश के नर्मदा तटवर्ती जिला केन्द्र मण्डला में 6वीं से 10वीं तक की पढ़ाई कर रहा था, तब रामशंकर जी प्रचारक होकर मण्डल आए थे। तब हम दोनों की उम्र में केवल एक वर्ष का ही अन्तर होने के कारण हम दोनों सही अर्थो में अभिन्न शरीर और संघ मन बन गये थे। उस समय मा. श्री एकनाथ जी रानडे महाकौशल प्रान्त के प्रचारक थे। संघ के अखिल भारतीय अधिकारियों में सर्वप्रथम हम लोगों का परिचय मा. बाबा साहेब आप्टे से हुआ। संघ केवल लाठी-काठी सिखाने वाला अखाड़ा नहीं अपितु हिन्दु समाज को संगठित करने का लक्ष्य लेकर चलने वाला कार्य है। यह बात सर्वप्रथम उन्हीं से सुनी थी। सन् 1947 में महाविद्यालयीन शिक्षा के लिए जब जबलपुर आया और तत्कालीन राबर्टसन कॉलेज में भर्ती हुआ तो माननीय रामशंकर जी भी वहां पढ़ने आये थे। तभी 30 जनवरी को प्रातः स्मरणीय महात्मा गांधी की हत्या हो गयी और राजनैतिक विद्वेषवश संघ को भी इसमें सम्मिलित मानकर प्रतिबंधित कर दिया गया। प.पू. श्री गुरूजी के आदेश से उसको हटवाने के लिए सत्याग्रह किया गया तो मैं भी तीन माह जैल में रहा और रामशंकर जी भुमिगत रह कर कार्य करते रहे। सन् 54 में मेरे प्रचारक निकलने के पश्चात् रामशंकर जी मेरे प्रांत प्रचारक बने और उनके नेतृत्व में मैं रायगढ़ जिला प्रचारक, सागरनगर प्रचारक तथा विन्ध्य विभाग प्रचारक का दायित्व सम्हालते हुए उनसे सब प्रकार का मार्गदर्शन करता रहा। श्री रामशंकर जी बाद में युग धर्म, राष्ट्र धर्म, आदि दैनिक व मासिक में भी काम करते रहे व हिन्दुस्तान समाचार और विश्व संवाद केन्द्र का भी काम अत्यन्त कुशलता से सम्हाला।
रामजन्म भूमि आन्दोलन के समय तो अयोध्या का विश्व संवाद केन्द्र ही उस अभूतपूर्व आन्दोलन के अद्यतन समाचार जानने का केन्द्र बिन्दु बना रहा यही नहीं विश्व संवाद केन्द्र समाचार सेवा का वही उद्गम भी था। गत वर्ष ही जब रायपुर गया था तब उनसे भेंट हुई थी और खूब देर तक हम अपने भूत काल में विचार करते रहे। रायपुर में वे अमरकंटक के बाबा नागराज द्वारा आविष्कृत जीवन विद्या का प्रचार करने के लिए रायपुर आ गये थे और दीनदयाल मानव अध्ययन केन्द्र का अध्यक्ष पद सम्हाल रहे थे।
ऐसे मेरे प्रायः संपूर्ण जीवन के साथी मा. रामशंकर जी तो इहलोक का अपना कर्तव्य निभा कर चले गये। मुझको भी देर सवेर उसी पथ का राही बनना है अतः उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
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Rajendra Kumar Chadha
National Joint Convener
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