अब चर्च की नजरों में नायक हैं गैलिलियो

वेटिकन सिटी। गैलिलियो गेलिली को कभी विधर्मी कहने वाला चर्च उनके टेलीस्कोप की 400वीं वर्षगांठ के अवसर पर अब उनके सम्मान में आगे आ रहा है। यह संयोग है कि अगले साल को संयुक्त राष्ट्र ने ईयर आफ एस्ट्रोनामी घोषित किया है।
चर्च से पीडि़त गैलिलियो के बारे में अब खुद वेटिकन के कई अधिकारी कह रहे हैं कि उन्हें आस्था और तर्क के बीच संवाद का संरक्षक घोषित किया जाए। रविवार को इटली के प्रसिद्ध खगोलविद और भौतिकविद गैलिलियो को खुद पोप बेंडिक्ट सोलहवें ने श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि गैलिलियो और अन्य वैज्ञानिकों ने आस्थावान लोगों को बेहतर समझबूझ में मदद की और ईश्वर के कार्य को संपन्न किया।
गैलिलियो के कार्यो की फिर से समीक्षा के लिए मई में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होगा जिसमें वेटिकन के कई अधिकारी मौजूद रहेंगे।
गैलिलियो गेलिली [1564-1642] ने यह प्रमाणित करने के लिए टेलिस्कोप का आविष्कार किया कि सूर्य के चारों ओर धरती परिक्रमा करती है। उस समय चर्च की मान्यता थी कि धरती ब्रह्मांड के केंद्र में है।
उस समय ताकतवर चर्च ने गैलिलियो के सिद्धांत को आस्था के लिए खतरनाक घोषित किया था। गैलिलियो ने लेकिन उसकी चेतावनी की परवाह नहीं की। नतीजतन 1633 में उन पर विधर्मी के तौर पर मुकदमा चला और उन्हें अपनी बात से मुकरने को मजबूर किया गया। गैलिलियो को उम्रकैद की सजा हुई जिसे बाद में नजरबंदी की सजा में तब्दील कर दिया गया।
चर्च को विज्ञान के प्रति अपने नजरिये से उबरने में कई साल लगे। सन 1992 में पोप जान पाल द्वितीय ने घोषित किया कि गैलिलियो के खिलाफ दी गई व्यवस्था एक भूल थी। लगता है इस स्वीकारोक्ति के बाद भी चर्च के दृष्टिकोण के प्रति नाराजगी में कमी नहीं आई है। जनवरी में बेंडिक्ट को रोम के ला स्पेंजा यूनिवर्सिटी में अपना भाषण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था। यूनिवर्सिटी के कुछ प्रोफेसरों ने गैलिलियो प्रकरण को उजागर करते हुए पोप को विज्ञान विरोधी धार्मिक हस्ती करार दिया था।










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